हिमाचल प्रदेश, 2 सितंबर 2025 — लगातार बारिश ने हिमाचल को भयावह आपदा की चपेट में ला दिया है। विशेष रूप से कुल्लू और मनाली घाटी में अचानक आई प्रवाहिक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) और भू-स्खलनों ने जान-माल की बड़ी क्षति पहुँचाई है।
आपदा का वर्तमान स्वरूप:
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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पूरे हिमाचल प्रदेश को “आपदा-प्रभावित राज्य” घोषित किया है, जिससे राहत और बचाव कार्यों के लिए आपातकालीन संसाधन सक्रिय हो सकते हैं।
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मौसम विभाग (IMD) ने चारों ओर रेड अलर्ट जारी कर दिया है; भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ की आशंका बनी हुई है।
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पिछले कुछ दिनों में लगातार बेमौसमी बारिश के कारण अब तक कम से कम पांच लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, और सैकड़ों बसीं सड़कें और पुल ढह चुके हैं।
कुल्लू-मनाली की विभीषिका:
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बीस नदी का उफान — तेज वर्षा और जल-अवरोधों से नदियाँ उफान पर हैं, विशेषकर मनाली में। झीलबाड़ी पुल सहित कई महत्वपूर्ण आधार ढह गए हैं।
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राजमार्गों का कण्ट्रोल खोना — कुल्लू-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-21) के कई हिस्से विभिन्न स्थानों पर बह गए या क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे सम्पर्क पूर्णतः टूट गया है।
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स्थानीय जीवन संकट में — दुकाने, ढाबे, छोटे होटल और आलू ग्राउंड जैसे व्यापारिक स्थल नष्ट हो गए हैं। गुरिल्ला स्थित शेर-ए-पंजाब जैसे प्रतिष्ठित रेस्तरां का केवल अग्रभाग ही बचा रह गया।
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बुनियादी सेवाएं बाधित — बिजली और जल आपूर्ति भारी रूप से प्रभावित हैं, दूरसंचार व्यवस्था भी कई जगहों पर चरमरा गई है।
राहत और पुनर्निर्माण प्रयास:
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राज्य भर में राहत और बचाव अभियान जारी है। कुल्लू और मनाली में सड़कों के पुनर्निर्माण, बिजली एवं संचार बहाली के कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं।
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10,000 से अधिक मनिमहेश यात्रा सहभागी सुरक्षित निकाले जा चुके हैं। इनकी मदद के लिए हवाई बचाव, अस्थायी आश्रय और राहत सामग्री मुहैया कराई गई है
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गृह विभाग द्वारा सड़क मार्ग पुनर्स्थापना कार्य तेज़ किया जा रहा है, जबकि सैटेलाइट फोन जैसे उपकरण दूरस्थ इलाकों में बचाव कार्य में उपयोग में लाए गए हैं।
आगे की चुनौती:
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IMD ने अभी से आगामी 48–72 घंटों को अत्यंत महत्वपूर्ण घोषित किया है, क्योंकि भारी बारिश जारी रहने की संभावना बनी हुई है।
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नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने, नदी-नालों के किनारे न जाने और अधिकारियों का पालन करने की अपील की गई है।









